KAILASA Library/Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक/उपलब्धियांSign in
Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक

उपलब्धियां

वैद्य सरोवर पर आनंद लिगं म विलक्षण दैवी घटना में समस्त रहस्यमयी शक्तियो ं से सं पन्न परम सिद्ध THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने मानवता को आनंद लिगं म के माध्यम से सजीव दिव्य ऊर्जा प्रदान की है। 21 फु ट लंबा यह शिव लिगं म आरोग्य ऊर्जा और जीवन मुक्ति की वर्षा प्रदान करता रहता है और मस्तिष्क, शरीर एवं आत्मा के लिए महान दिव्य संजीवनी स्वरुप है।

9 चिकित्स कीय पदार्थों और 1008 जड़ी-बूटियो ं के गोपनीय सम्मिश्रण से निर्मित नवपाषाण। सिद्ध परम्परा में नवपाषाण एक दर्ल ु भ औषधि है जिसे दिव्य ऊर्जाओ ं से पुष्ट करके यौगिक क्रियाओ ं के माध्यम से के वल एक जीवित सिद्ध योगी द्वारा ही तैयार किया जाता है।

अति दर्ल ु भ अवसरो मे मानवता इस शक्तिशाली वैद्य विज्ञान मे पारंगत हुयी है - इसमें तीन घटनाओ की परस्पर होने की आवश्यकता होती है - स्थापति (वैदिक शिल्प) और औषधि यो ं में पारंगत एक सिद्ध योगी और आत्मज्ञानी पुरुष जो मूर्ति मे दैवी प्राणप्रतिष्ठा सम्पन्न कर सके । 2000 वर्ष पूर्व महान सिद्ध बोगर के साथ यह पलनि में हुआ था।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM विश्व के महान चिकित्स को ं एवं चिकित्सा क्षेत्र के जनको ं जैसे महर्षि सूश्रुत, महान वैदिक शल्यचिकित्स क आचार्य चरक, सिद्ध चिकित्सा के जनक - महर्षि अगस्त्य द्वारा वैज्ञानिक रूप से प्रतिपादित चिकित्सकीय क्षेत्रों आयु क्षेत्रों र्वेद, सिद्ध, प्राकृ तिक चिकित्सा एवं वर्मा को सक्रिय तरीके से पुनर्स्थापि त करने में जुटे हुये हैं। t फार्माकोलौजि (औषध विज्ञान)

विलुप्त हो चुके वैदिक औषधि सूत्रों को ताड़प त्रों से दु बारा प्राप्त करना,औषधीय मिश्रणो ं का निर्माण, उनका चिकित्सकीय परीक्षण करने के बाद मानवता की सेवा के लिये उपलब्ध कराना।

उपचारात्मक आयुर्वेद और सिद्ध औषधियां आनंद लि ंगम चारो ंओर उपचारात्मक शक्तियो ंके जल से युक्त 'वैद्य सरोवर' और वातावरण को उपरात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रखने वाली जड़ी-बूटियो ंसे धिरा हुआ है, इसके अदं र और आसपास आने वाले हर व्यक्ति को तुरंत उपचार मिलता है। t अस्पताल, महाविद्यालय, अनुसं धान केंद्र रोगि यो ंके उपचार हेतु यौगिक एवं वैदिक अस्पतालो ंका निर्मा ण। आयर्ु वेद, सिद्ध, प्राकृ तिक चिकि त्सा और वर्माजैसी पारम्परिक चिकि त्सा पद्धतियो ं पर आधारित महाविद्यालयो ं एवं अनुसं धान सं स्थानो ं की स्थापना। t वैदिक जीवन विज्ञान का पुनर्प्रचलन

भगवान शिव द्वारा 'कामिका आगम' जो कि अति स्पष्टता से अद्वैत जीवन जीने का ज्ञान पद, क्रिया पद आदि 'शिवोऽहं की जीवनशैली' बताता है तथा घरों, मंदिरों, समुदायों तथा यज्ञों से जुड़े दैनिक नित्यकर्म से नैमितिक कर्म के अनुष्ठानों के बारे में बताता है।

ज्योतिष, वैदिक खगोलशास्त्र, वैदिक पंचांग के पूर्ण विज्ञान एवं ग्रहों की स्थिति।

वास्तुशास्त्र, वास्तुशिल्प एवं निर्माण विज्ञान।

एवं प्राणमथोङ्कारं यस्मात्सर्वमनेकधा। युनक्ति युञ्जते वापि यस्माद्योग इति स्तः मृ ॥ एकत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथवै च। सर्वभावपरित्यागो योग इत्यभिधीयत् ॥

जब योगी अपनी श्वासो को ॐ मे मिलाते है या जब वे विविध प्रकारो से सं पूर्णता मे समाहित हो जाते है, उसे योग कहते है। इस श्वास, मन और इंद्रियो का एकत् ं वं और समस्त विचारो और भा ं वो के पर ं ित्याग को ही योग कहा जाता है।

~ मैत्री उपनिषद्६.२५ कृ ष्ण यजर्वेदु ्

योग आज विश्व में सबसे अधिक अभ्यास किया जाने वाला धर्मव जीवनशैली है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा स्थापित नित्य योगSM, योग के परमपिता व सं स्थापक आदियोगी महादेव, महानतम हठयोगी स्वात्माराम, योगतंत्र के जनक पतञ्जलि और महान नाथ योगियोंमच्छेंद्र नाथ एवं गोरखनाथ द्वारा प्रकट 'मूल' यौगिक शास्त्र के योगो का पुन ं र्गठन है।

वर्तमान योग प्रणाली तो वास्तवित योगिक क्रियाओ का भी प्र ं तिवाद करता है और योग को इसने मात्र आसनो और ं प्राणायाम (श्वसन तकनीक) तक सीमित रखा है। अधिकतर मानवता को योग के शुद्ध व मौलिक रूप से प्रथक रखा गाय हैं। वस्त्ताव

मे योग मन-मस्तिष्क व आत्मा का अद्वैत भाव मे एकाकार होना है ।

Now has come the urgent time for these yogic sciences to be systematically revealed to the world through an adept Living Yogi, ensuring a new age of Yogic traditions flowing from the oldest, purest yogic streams.