KAILASA Library/Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक/दीक्षा: धार्मिक बौद्धिक क्षत्रिय अकादमीSign in
Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक

दीक्षा: धार्मिक बौद्धिक क्षत्रिय अकादमी

"बौद्धिक क्षत्रिय" धार्मिक प्रणाली का उपयोग करके समाज का नेतृत्व करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। वे विभिन्न व्यवसायोंमें सेवारत हो सकते हैं: राजनीति, सरकार, कानून, उद्योग, शिक्षा, जन सं पर्क माध्यम, सेना, इत्यादि।

दर्भा ु ग्य से, सदियो से इ ं स्लामी और ब्रिटिश शासन के अधीन रहने के कारण, हम अपनी सोचने की शक्ति और अपने नेतृत्व के गुणो को खो बैठे। धीरे-धीरे ं हमें ये भ्रम हो गया कि दूसरो का अनुसरण करने से ं हम श्रेष्ठ बनेंगे। हिन्दू धार्मिक तंत्र जो कि अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र, नीति-शास्त्र और अन्य सं बंधित शास्त्रों पर स्त्रों आधारित थे, उनकी मान्यता समाज में कम होती गयी। अंततः, हम में से बहुतों ने पाश्चात्य विचारधारा के दृष्टिकोण को ही अपना लिया, जिसके अनुसार वैदिक परम्पराएं तो एक दम पिछड़ी और उत्पीड़क हैं।

वैदिक ज्ञान सिखाने के कई प्रयास हुए हैं, परन्तु आज के कु रुक्षेत्र में जहाँ सभ्यताओं के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है, वहां केवल इतना करना पर्याप्त नहींहै। हमें हिन्दू नेताओ को स ं िखाना होगा कि विभिन्न परिस्थितियोंमें कै से दूसरी सभ्यताओ के ं साथ व्यवहार करना है, और इसके लिए इन सभ्यताओ को स ं मझना आवश्यक है। हमारी पारम्परिक पूर्व-पक्ष करने की पद्धति दसरे पक्ष को स ु मझने का एक उत्तम तरीका है। पूर्व-पक्ष करने के पश्चात, उत्तर-पक्ष (हमें कै से प्रतिक्रिया करनी है) अपने आप समझ में आ जाता है। आज कल की भाषा में कहें तो, इस पद्धति में हम अपनी दृष्टि को पलट देते हैं, जिससे कि हम दूसरे पक्ष को अपने ढांचे के अनुसार समझ पाएं ।

इस समय हम दोहरा संकट झेल रहे हैं। एक तरफ हम हिन्दू फोबीया (हिंदुओं के प्रति भय और द्वेष) से जूझ रहे हैं, जो कि हम पर लगातार घृणित वार करती रहती है। दूसरी तरफ हमारी संपत्ति को, हमारी संस्कृति को अन्य धर्म अपना बता कर हड़प रहे हैं - उदाहरणतः "ईसाई योग" आंदोलन में योग को ईसाई धर्म से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यदि हमें प्रमुख अवैदिक धर्मों का पूर्व-पक्ष ज्ञात है, तो हम अपनी भिन्नता और अपनी विशेषताओ को विश्व मंच पर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं, विपक्ष के साथ कई विषयो पर तर्क-वितर्क कर सकते हैं, और वैदिक ज्ञान के द्वारा मानवता के समक्ष प्रस्तुत आधुनिक चुनौतियों को सुलझा सकते हैं।

"दीक्षा" की प्रशिक्षण अकादमी, शिक्षको को अन्य विद्यापीठो और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए भेजेगी, जहां के छात्र विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी बन रहे हैं । उदाहरण के लिए, हम "दीक्षा" पाठ्यक्रम को ऐसे संस्थानों में पढ़ा सकते हैं, जैसे कि एक प्रबंधन महाविद्यालय में, या हिन्दू विदेश सेवा के नव चयनित अधिकारियो को, अथवा संचार से सम्भंधित विश्वविद्यालयों में जहां नए पत्रकार बन रहे हैं। दूसरे शब्दों में हम अपने शिक्षको और पाठ्यक्रम को इन संस्थानों को भेंट स्वरुप देंगे, इस आशा के साथ कि वह इसे अपने शिक्षण में सम्मिलित कर लेंगे।

नित्यानंद ध्यानपीठम में हिन्दू इंटरनेट थिक टैंक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जे ने पूरे भारत से १०० से अधिक व्यक्तियो को हिन्दू धर्म की रक्षा करने और इसके पवित्र सिद्धांतो को इंटरनेट के माध्यम से बढ़ावा देने में उनके सक्रिय योगदान के लिए 'हिन्दू क्षत्रिय पुरस्कार" से सम्मानित किया। केवल आध्यात्मिक शक्ति के आधार पर एक शक्तिशाली और प्रगतिशील भारतवर्ष का निर्माण किया जा सकता है, जो कि अपनी आध्यात्मिकता की पूँजी को पूरे संसार के साथ बाँट सकता है।

परमपूज्य श्री डा.शांतावीरा महास्वामी जी, श्री कोलाडा मठ महासंस्थान एवं अन्य महाजनो के साथ

With पेरः महा वेमाल्धाम्मा : संघ, थेरवाद बौद्ध धर्म, कं बोडिया

परमपूज्य श्री डा.शांतावीरा महास्वामी जी, श्री कोलाडा मठ महासंस्थान एवं अन्य महाजनो के साथ

कम्बोडिया के गणमान्य अतिथि : हिज एक्सेलेंसी खिम भोसोन , सीए रीप के और गवर्नर के सलाहकार , नू फल्ला के

साथ

कुंभ मेला 2015 में कई हिन्दू आध्यात्मिक संस्थाओ के अधिनायको के साथ सनातन हिन्दू धर्म की महिमा का प्रसार करते हुए

नासिक कुंभ मेले सन 2015 में महामंडलेश्वर श्री 1008 विश्वेश्वर आनंद जी महाराज के साथ

मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिहं चौहान द्वारा कुंभ मेला उज्जैन के लिए आमंत्रण ग्रहण करते हुए

कुंभ मेला 2015 में कई हिन्दू आध्यात्मिक संस्थाओ के अधिनायको के साथ

(बाएं से दाएं ) कुंभ मेला 2013 में विश्व गुरु महामंडलेश्वर परमहंस स्वामी महेश्वरानंद जी, आचार्य महामंडलेश्वर श्री विश्वदेवानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री आत्मानंद जी महाराज

कुंभ मेला 2015 में कई हिन्दू आध्यात्मिक संस्थाओ के अधिनायको के साथ भंडारे का आयोजन करते हुए

कंभ मेला: धर्म के संरक्षकों का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संगम

कुंभ मेला हजारों वर्षों से प्रथ्वी पर समर्पित विश्वास के साथ करोड़ो आध्यात्मिक प्राणियो का सबसे बड़ा जमावड़ा है । इस दिव्य संगम में सनातन हिन्दू धर्म के सिद्धांतो से पूरी मानवता की उच्चतम चेतना का विकास होता है |

परमपूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर होने के नाते वैदिक सनातन धर्म की उच्चतम जिम्मेदारी उठा रहे हैं एवम उसे पतन से बचाते हुए नई ऊं चाइयो तक ले जा रहे हैं |

नासिक, महाराष्ट्र में आयोजित सितंबर 2015 के कुंभ मेले में श्री जयकांत शिखरे, त्र्यंबकेश्वर मंदिर के ट्रस्टी द्वारा सम्मानित किए जाते हुए

गत वर्ष सितंबर 2015 में नासिक महाराष्ट्र में आयोजित कंभ मेले में हिंदुत्व के विभिन्न आयामों का अनुभव हुआ| कई समारोह एवं आध्यात्मिक अभिभाषण का आयोजन नित्यानंद ध्यानपीठ के शिविर में हुआ जहां पर विभिन्न अखाड़ों के संत शिरोमणियों ने हिंदुत्व के अलग-अलग आयामों का प्रतिनिधित्व किया |

श्री स्वामी नारेंद्रगिरी जी द्वारा THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी को प्रेषित पत्र

कामिक अगमा में भगवान शिव ने शिव दीक्षा या समय दीक्षा को आध्यात्मिक जीवन की तरफ पहला कदम बताया है। यह दीक्षा उन सभी साधको को दी जाती है जो भगवान शिव की सेवा में लीन हैं, जो भगवान शिव के भक्त हैं और जो हिन्दू धर्म को अपनी जीवन शैली बनाना चाहते हैं।

~ परमपूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

समय दीक्षा - स्वयं भगवान शिव द्वारा दी गई दीक्षा

"आगम" स्वयं भगवान शिव द्वारा कहे गए शब्द हैं जो मानवता को एक सशक्त, आनंदमय जीवन जीने, शिवोहम भाव में रहने तथा हिंदुत्व जीवन शैली का अभ्यास करने की ओर प्रेरित करते हैं।

कामिका आगम में भगवान शिव ने सदाशिव स्वरूप जीवंत गुरु द्वारा दी जाने वाली शिव दीक्षा के विषय में विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। विशिष्ट दीक्षाओ के माध्यम से भगवान शिव ने मानवता को जाति, लिंग एवं जीवन शैली के परे एक प्रतिबद्ध जीवन जीने की दिशा दी है जिससे मानव अपनी चेतना को जागृत कर सकता है।

~ समय दीक्षा ऐसी प्रथम दीक्षा है जो हमें मंदिर पर आधारित हिन्दू जीवन शैली से लाभान्वित करती है।

~ विशेष दीक्षा, अगली विशिष्ट दीक्षा है जो भगवान शिव की गहन कृपा बरसाती है। दीक्षा में गुरु, दीक्षित साधकों को जीवनमुक्ति की जीवनशैली की ओर प्रेरित करते हैं।

दीक्षा हिंदुत्व के अभ्यास हेतु शक्तिशाली दीक्षाएं

माननीय श्री 108 महंत स्वामी नरेंद्रगिरि जी महाराज के साथ

1 सप्ताह पूर्व कुछ समाचार चैनल वाले मेरे समक्ष आए और वे मुझसे स्वामी जी के बारे में कुछ बोलने का आग्रह करने लगे| तब मने कहा ैं स्वामीजी सनातन धर्म के आधार हैं, स्वामीजी से जुड़े सभी लोग बहुत ही भाग्यशाली हैं| मैं स्वयं को भी बहुत भाग्यशाली समझता हूं क्योंकि मैं स्वामी जी से जुड़ा हूं| अगर स्वामी जी के विषय में बात करें तो मेरा यह मानना है की कड़ी तपस्या और ध्यान से इंसान भी भगवान में परिवर्तित हो जाता है|

आज इस आदीनम में आप सभी के समक्ष आकर एवं माननीय THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की पवित्रता, तापस और शक्ति देख कर ऐसा लग रहा है कि मानो साक्षात मैं किसी दिव्य पुरुष के समक्ष आ गया हूँ |

माननीय श्री 108 महंत स्वामी नरेंद्रगिरि जी महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद

(13 अखाड़ों के अध्यक्ष)

"संयम का अर्थ है अपने ममकार को परिवर्तित करना| अपने अहम को शिवोहम् में रूपांतरित करना| मनुष्य को परिवर्तित करने के विज्ञान को ही संयम कहते हैं|"

~ परमपूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने हजारो साधको को शिव दीक्षा से दीक्षित किया है जिससे वह हिंदुत्व के वैदिक पथ पर अग्रसर हो सकें ।

स्वामी जी के आशीर्वाद से लाखो लोग लाभान्वित होगे एवं स्वयं तथा पृथ्वी की चेतना को जागृत करने में सक्षम होगे। सत्यनिष्ठ, शिवत्व और हिंदुत्व की जीवनशैली जीने हेतु यह विशाल स्तर की दीक्षाए साधको के लिए एक अनूठी भेंट है। यह दीक्षा अनुष्ठान एक दिव्य घटना है जहां पर परम पूज्य स्वामीजी सदाशिव के भाव में रहकर स्वयं प्रत्येक व्यक्ति को अग्नि के समक्ष मंत्रों के उच्चारण द्वारा दीक्षित करते हैं।

वैदिक परंपरा के अनुसार सभी प्रतिभागियो को पवित्र वैदिक वस्तु जैसे भस्म या विभूति की थैली, रुद्राक्ष इत्यादि उपलब्ध कराए जाते हैं जो स्वयं सदाशिव की ऊर्जा हैं ।

हिन्दू धर्म के वैदिक पंथ को जीने हेतु विशाल स्तर पर दीक्षा

1000रों श्रद्धालु भगवान शिव द्वारा बताई गई समय दीक्षा में स्वयं परम पूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा बैंगलुरू आदीनम में दीक्षित किए जाते हैं

दीक्षित होने के उपरांत प्रतिभागी कंठ में रुद्राक्ष बांधते हुए एवं हिन्दू जीवन जीने की प्रतिज्ञा लेते हुए

शिव रूपी गुरु द्वारा दीक्षित होने के उपरांत आनंदमय श्रद्धालु

स न इन्द्रः शिवः सखश्ववद गो मद्ववम उरुधारेव् दोहते । विद्युत शक्ति हमारी शांतिपूर्ण मित्र रहे, हमारे यंत्रों को चलाने के लिए अश्व-शक्ति दे, घरोंमें उजाले के लिये हमें प्रकाश दे और खेतोंमें अन्न उपजानें के लिये शक्ति दे। यह विभिन्न धाराओंमें प्रवाहित होकर हमें समृद्धि दे एवं हमारा कल्याण करे। ~ अथर्ववेद (१. ७. ३ )

वैदिक युग के तकनीक पर दृष्टिपात