Reviving the Authentic Hindu Education System
'' भारत में मैकाले और मैक्स मयूलर द्वारा स्थापित वर्तम ान शिक्षा प्रणाली 'भागीदारी के बिना बोल कर पढ़ाई' जाने वाली शिक्षा शैली है। मूल हिंदू शिक्षा प्रणाली में शब्दों, विचारो, परिकल्पनाओ, सिद्धांतो, धर्मशास्त्रों को लगातार बताया न हीं जाता था। यह विद्यार्थियो को सही संदर्भ में जागृत (आत्मबोध) करती थी। हिंदू शिक्षा पद्धति - 'गुरूकु ल' - के अंतर्गत ज्ञान को स्थांतरित न करके पारेषित किया जाता था। मेरे गुरूकु ल के शिष्य अपने शरीर का उपयोग 'पीसी' की तरह नही करेंगे, जो मात्र दी गयी सूचनाओ के आधार पर काम करता है। वे 'इंटरनेट' की तरह दिव्य अभिलेखागारों में भंडारित ज्ञान तक पहुंच बनाकर स्वयं का अविष्कार और शोध करेंगे ! " ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
नित्यानंद गुरूकु ल SM एक प्रबुद्ध वं श का निरयामाण
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यम करवावहे। तेजस्वी नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः।।
ॐ हम दोनो (गुरू और शिष्य) की साथ मे रक्षा हो। हम दोनोंज्ञान से पोषित और लाभान्वित होये। हम दोनोंमहान बल, ऊर्जा और उत्साह के साथ कार्य करें। हम दोनो का शिक्षण हमे तीव्र, उत्तम बुद्धि के तेज से प्रकाशित करे। हम दोनों में परस्पर शत्रुता या अपूर्णता न हो। ॐ अंतर आकाश में शांति हो, प्रकृति में शांति हो। दैविक शक्तियां में शांत हो। ~ कृ ष्ण यजर्वेदु , तैतरेय उपनिषद, २ . २ . २
यह सनातन हिंदू धर्म की मौलिक हिंदू शिक्षण पद्धति है, जहाां पर शिष्य कम आयु से ही अपने प्रबुद्ध गुरूओ के साथ रहते हुये 64 विद्याओ को सीखते हैं। ज्ञान को गुरू की जैविक-स्मृति (bio-memory) द्वारा शिष्यों में पारेषित किया जाता था। यहां से प्रशिक्षित शिष्य अध्यात्मिक रूप से बुद्धिमान बनकर निकलते थे और अपनी सिद्धियो (रहस्यमय शक्तियो) के विकिरण से ऊं ची उपलब्धि प्राप्त कर विश्व का नेतृत्व किया करते थे। नित्यानंद गुरूकु लSM तेजी से न के वल भारत में पर दुनिया भर में, अवतार THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के नेतृत्व में प्राचीन गुरूकु ल शिक्षा पद्धति को उसके पूर्णमौलिक रूप में पुनर्जीवित करने मे कार्यरत है। ~ परमपूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामी
गुरुकु ल का अर्थहै गुरु का परिवार| गुरुकु ल में शिक्षको से ज्यादा शिक्षा पर महत्व दिया जाता है|छात्रों को विकसित होने और आविष्कार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है | बाल सं तो को अपनी क्रियात्मकता को खोजने के लिए सं पूर्ण आजादी दी जाती है| गुरु अंधेरे में दिए की तरह सदेव छात्रों को का मार्गदर्शन करते हैं तथा उन्हें आत्मखोज में सहायता करते हैं|
- ® उत्तम शिक्षाविदो के साथ नित्य योग, मलखं भ, रस्सी योग,धनुर्विद्या, ध्यान, अखाड़ा, वेद प्राणायाम, नाट्य-नाटक-संगीत-शिल्प-चित्रकला (सभी प्रकार की पारंपरिक प्रदर्शन कलाएं एवं सूक्ष्म कलाएं ), वाक्यार्थ सदस (जीवन समाधान के अध्यात्मिकवादविवाद), पूजा, विधि और अगम शास्त्र के अनुसार जीवन पद्धति।
- ® पूर्णमस्तिष्क प्रशिक्षण, तनावमुक्त, किशोर हिंसा अथवा आक्रमण रहित।
- ® 50 % शिष्य अपने स्तर से एक से तीन वर्ष आगे हैं, 15 वर्ष की आयु के पूर्व ही दसवी ंकी बोर्ड परीक्षा देते हैं।
- ® 35 % शिष्य का बौद्धिक स्तर 130 से ऊपर है-स्लोसन आईक् यूस्कोर की श्रेणी के अनुसार प्रतिभाशाली हैं।