महत्तम मानवीय क्षमताओं का जागरण
वैदिक Bharat की धर्म भूमि पर अगणित सर्वोत्तम योगदान दिया है।
शक्तिशाली पवित्र एवं क्षमाशील हृदययुक्त मानवता को समृद्ध करने की महान इच्छाशक्ति वाले के सरिया वस्त्रधारी सं त अवतरित हुये हैं। इन सं न्यासियो ने विश्व को अपना ं घर माना और द्वार-द्वार घूमकर लोगो पर कृ पादृ ं ष्टि डालकर, उनका उपचार करके सत्य के प्रति जागृत किया। सम्पूर्ण Bharat सं न्यासियो द्ं वारा निर्मित किया गया। चाहे शिल्प हो, कला हो, विज्ञान हो, सं स्कृति अथवा भाषा हो, सन्यासियो ने ं वैदिक परम्परा में अपना
- ® THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की Bharat के लिये वैदिक हिं दू पुनर्जागरण हेतु जो दिव्यदृष्टि है, उसमें सं न्यास परम्परा का पुनरोत्थान समावेशित है। वह आज के युवाओ को पू ं र्णत्व के परम पथ पर आनन्दमय त्याग का जीवन जीने को प्रेरित कर रहें हैं।
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत । क्षुरक्षुस्य धारा निशिता दरुत्यया दर्गमु पथस् तत् कवयो वदन्ति ॥
उठो ! स्वयं जागो और अन्य को जागृत करो। महान जागृत प्रबुद्ध जीवो के सानिध्य मे जाओं तब तक कि तुम स्वयं जाग्रत न हो जाओ और अपनी पूर्णत्वता को प्रकट न कर लो। छुरी की धार जैसा तीक्ष्ण रास्ता है (अद्वैत जीवन का), एसा कवि ज्ञानियो ने घोषित किया है - मार्ग दीर्घ एवं दुर्गं है और इसे पार करना कठिन है।
~ कठोपनिषद १.३.१४