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Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक

नित्य योग शिक्षक प्रशिक्षण

"योग हमारी विरासत है । योग सारी दनिु या की अमानत है| हमारे पास योग का कोई कॉपीराइट तो नहींहै परंतु मैं योग को सं रक्षित करने और मिश्रित होने से बचाने के पक्ष में हूं| योग के अनुकू लन से योग मिश्रित नहींहोना चाहिए| एक सच्चा योगाचार्य योग का अनुकू लन तो करता है पर उसे मिश्रित नही करता| ं जन्मजात योगी होने के नाते मैं न सिर्फ योग पद्धति के साथ प्रबलता से खड़ा हूं अपितु उसके शुद्ध तत्व को सं रक्षित करना मेरी जिम्मेदारी है|"

~ परमपूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

नित्य योग के द्वारा परम पूज्य श्री नित्यानंद जी ने मेरे जीवन में मानो एक बहुमूल्य कोष को खोल दिया है - मुझे एक ऐसी अद्भुत द्भु शक्ति दे दी है जो अब तक मेरे भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में मेरे लिए उपलब्ध नहींथी। नित्य योग द्वारा मैंने यह सीखा है कि कै से मैं अपने शरीर और मन को अपनी मनचाही वास्तविकता की रचना करने के लिए सं रेखित कर सकती हूँ। और यह सब मैं बहुत ही आनन्दमयी एवं सरल तरीके से कर सकती हूँ। इससे मेरे हर प्रयास का आरम्भ अब सफलता एवं सुख से ही होता है। मैं अपनी इच्छा को अपने शरीर का एक अंग बन लेती हूँ, जिससे वह स्वतः पूर्णहो जाती है। मैं स्वामीजी का आभार व्यक्त करना चाहती हूँ की उन्होंने न्हों मुझे जीवन रुपी आसनं में स्थिरं और सुखं का अनुभव कराया।

अनु देशपांडे, सिगापूर ं

माइक्रोसॉफ्ट, भारत की पूर्व विपणन (मार्केटिं ग) निदेशक

नित्य योग केद्वारा परम पूज्य श्री नित्यानंद जी नेमझु ेयह अनुभव कराया कि यह प्रशिक्षण केवल आसन, ध्यान, अच्छेशारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं है। यह तो शरीर, मन और आत्मा के माध्यम सेचेतना केउच्च स्तर अनुभव करनेकेलिए ह, ै अपनी जागरूकता बढ़नेकेलिए हैऔर पुरेअस्तित्व केसाथ अद्वैत अनुभव करनेकेलिए है। यह एक नैतिक ज्ञान सेकहींअधिक ह, ै यह तो पुराचीन शास्त्रों केउस परम विज्ञान को पुनर्जीवित कर रहा हैजो हमारी चेतना का विकास करता है और हमें आत्मबोध कराता है। यह सीधे ज्ञान के परम स्रोत से ह!ै

यिग रो ं ज़ ली (माँ नित्य गंगानन्दा) जनपदीय अभियंता, कै लिफ़ोर्निया, अमेरिका

नित्य योग आचार्य प्रशिक्षण मेरे लिए एक बहुआयामी भीतरी आध्यात्मिक यात्रा के समान रही है - एक अत्यन्त ही प्रबल, लाभप्रद आत्म बोध कराने वाली यात्रा। इससे मेरे अंदर की असाधारण सिद्धियां व्यक्त हुईं, और मुझे पता चला कि एक सच्चे योगी का जीवन कै सा होता है। मेरे गुरु और महा योगी, परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी कहते हैं कि "योग एक निरन्तर अभ्यास है - जिसका कभी अंत नहींहोता"। इससे मुझे प्रेरणा मिली कि मैं अपनी सर्वोच्च क्षमता तक पहुँचूँ , और योग के पांच पथ का प्रसार करूँ: कर्म योग - कर्म का मार्ग, भक्ति योग - भक्ति का मार्ग, ज्ञान योग - ज्ञान का मार्ग, राज योग- साधना का मार्ग और हठ योग - शरीर, मन एवं प्राण कोष के शुद्धिकरण का मार्ग। इस अभ्यास से मैं आनंद और करुणा से भर गयी हूँ।

  • -अराबेल्ला कार्बोन (माँ नित्य समर्पिणी) आध्यात्मिक जीवन की प्रशिक्षक न्यू यॉर्क, अमेरिका

नित्य योग आचार्य प्रशिक्षण मेरे लिए एक बहुत ही अद्भुत अनुभ द्भु व रहा है। इससे हमारे लिए स्वामीजी के मार्गदर्शन से वैदिक सं स्कृति और योग को अपने विशुद्ध मूल रूप में पुनर्जीवित कर पाना सं भव हुआ है। मैं स्वामीजी का धन्यवाद व्यक्त करना चाहती हूँकि उन्होंने न्हों हमें यह अवसर दिया।

अभिषिणी सिवानेसर्जह, टोरंटो, कनाडा छात्रा

शास्त्रों द्स्त्रों वारा प्रमाणित 84 योग आसन

नित्य क्रियाSM यौगिक चिकित्सा समाधानो की उत्त ं म श्रंखला है जिसका THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने रहस्योद्घाटन किया है। इन क्रियाओ द्वारा भावनात्मक और शारीरिक समस्याओ के ल ं िए सामाधान प्राप्त होता है अन्द यें इन्टरनेट पर निशुल्क उपलब्ध हैं ।

ये अद्वितीय हैं कयोकिं इनका ज्ञान और तकनीक भारत के यौगिक शास्त्रों से ल स्त्रों िया गया है और साथ ही इनका विशिष्ट सं योजन THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के व्यक्तिगत अनुभवो, अनुस ं न्धान से व्यक्त किया गया है, इस उद्देश्य के साथ जससे विभिन्न शारीरिक रोगो की च ं िकित्सा की जा सके और विभिन्न बीमारियो को रोका ं जा सके ।

नित्य क्रियाSM ने यौगिक क्रियाओ की ं मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए उन्हेंजगत को प्रदान किया है। इनका जन्म ऐसे सिद्ध योगिओ के ं हजारो वर्षो के योगदान के बाद हुआ जिन्होंने अपना सं पू िन्हों र्णजीवन ही यौगिक विज्ञान को समर्पित कर दिया था।

नित्य क्रियाSM निम्नलिखित घटको का सं चय ं है :

  • w आसन
  • w कुम्भक, प्राणायाम (श्वांसो कि क्रियाएं )
  • w कल्पनाविज्ञान
  • w मं त्र (आतंरिक मंत्रोच्चारण) आन्तरिक रूप से सुनना अथवा किसी ध्वनि को दोहराना
  • w बाहरी मंत्रोच्चारण बाहर किसी ध्वनि का उच्चारण करना
  • w शिव तांडव करण भगवान् शिव की अलौकिक नृत्य मुद्राएँ

नित्य क्रियाओ से स्ं थाई उपचार होता है क्योंकि यह कोशिकीय जैव स्मृति और मानव के मन- शारीर तंत्र के स्तर पर कार्य करती है और इनका कोई नकारात्मक प्रभाव नहींहै |