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Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक

नित्य ध्यान योग और नित्य क्रिया योग वैदिक शास्त्रों पर निर्धारित ध्यान शिविर

ध्यान शिविर के माध्यम से परमपूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM लाखोंश्रद्धालुओ के हृदय में आत्मज्ञान का बीज बो रहे हैं जिससे प्रतिभागी अपनी उच्चतम क्षमता तक पहुंच सके और जीवन में स्वास्थ्य, उन्नति एवं आनंद का अनुभव कर सकें ।

गत वर्षों में हजारो ऐसे ध्यान कार्यक्रम २-वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के माध्यम से Bharat एवं विदेशों में आयोजित किए गए हैं। यह चेतना जागृत करने वाले कार्यक्रम प्रत्येक व्यक्ति की स्वयं के प्रति, जीवन के प्रति, अपने रिश्तो के प्रति, एवं जगत के प्रति धारणा को परिवर्तित करने में सक्षम है। इन कार्यक्रमोंमें बताए जाने वाले सत्य वैदिक शास्त्रों द्वारा प्रमाणित है। यह कार्यक्रम स्वयं एक अवतार द्वारा दीक्षा की भेंट प्रदान करते हैं। दूर करता है। इसके अतिरिक्त आगमो पर आधार ित, विभिन्न विषयो पर कई दूसरे ध्यान शिविर जैसे - धन की चेतना, परिपूर्ण रिश्ते, समय पर विजय प्राप्त करना इत्यादि आयोजित किए जाते हैं।

नित्य ध्यान योग कार्यक्रम उपनिषद, शिव सूत्र

आदि वैदिक शास्त्रों द्वारा प्रमाणित पूर्णत्व प्रक्रिया तथा चक्र जागृत करने के विज्ञान को ध्यान क्रियाओ के माध्यम से सिखाता है।

नित्य क्रिया योग पं चकोश का शुद्धिकरण कर सूक्ष्म शरीर से गहरे शारीरिक एवं भावनात्मक दुखो को

पहले दस दिनों मे हमें भावनात्मक उपचार का अनुभव हुआ । स्वयं से, दूसरो से, अपने स्वास्थ्य से एवं अपने पूर्वजन्म की असम्पूर्तियो को मिटाने पर कार्य किया । THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने हमें एक ल क्ष्य के अनुसार इन प्रक्रियाओ का अनुसरण करने के लिए कहा। वह अवस्था खोजना जहाँ शक्तिहीनता और आत्मशं का उत्पन्न न हो, और यदि उत्पन्न हो भी तो हममें इतनी क्षमता होनी चाहिए की हम उसे तुरंत जान पाएँ ।

अब सोचती हूँ कै से मैंने इस तरह से मेरे सारे जीवन को नही जं िया? मैं स्पष्ट रूप से वे सं स्कार देख सकती हूँ, जिसने मुझे हताशा और पीड़ा ने जकड़ लिया था और किस तरह इन सं स्कारो के कारण स्वयं को मैं बहुत छोटा अनुभव करती थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मैं अपने जीवन में सर्वोत्तम चीजो की स्वामी नही हं ूँ। अवश्य मैं स्वयं के लिए यह चाहती थी, लेकिन मैं अपने सं स्कारो से इतनी धूमिल थी की मेरे लिए आगे बढ़ पाना कठिन था । यह एक सशक्तिकरण की प्रक्रिया है। और मैं अविश्वसनीय रूप से स्वादिष्ट भोजन के सा थ शांतिपूर्ण योग, आयुर्वेद, वैदिक अनुष्ठानो का उल्लेख करना तो भूल गयी ।

इनर अवेकनिग अद्भुत है । मैं वास्तविक रूप से चाहूंगी की सभी इस क्रिया का अनुभव करें, और स्वामीजी का भी । स्वामीजी केवल यह चाहते हैं की सम्पूर्ण विश्व अपनी उच्चतम सं भावना, जागरूकता और ईश्वरत्व चेतना मे वद्धिृ कर सके ।

  • सिं थिया नार्सिसी

योग शिक्षक, स्वास्थ्य प्रशिक्षक, लेखक लेखक - शिकागो, यु एस ए

इनर अवेकनिग ® प्रतिभागी

ह मेरा दूसरा इनर अवेकनिगं कार्यक्रम है और जैसा कि स्वामीजी कहते हैं कोई दो इनर अवेकनिग एक सा मान नहीं होती । मेरा पहले इनर अवेकनिग का अनुभ व बहुत ही प्रभावशाली था और मैंने कु छ अच्छे परिवर्तन भी अनुभव किये । परन्तु दसरे आई . ए . मैं मानो अंतरात्मा में एक परमाणु विस्फोट सा हो गया हो ।

यहाँ आने से पहले जीवन के प्रति मेरा प्रबल प्रतिरोध था। जीवन में उत्तरदायित्व लेने के प्रति मेरी असम रता कोमैं समझ नही पा र ं हा था। मैं अपने आपको एक ही सी परिस्थितियों में जकड़ा हुआ पाता था । मैं विक्षमता अनुभव कर रहा था और मेरा पूर्णत्व के प्रति कड़ा प्रतिरोध था। मैं यहाँ सब कु छ बदलने के उद्देश्य से आया था, और स्वामीजी के सानिध्य में यह बहुतसरल साबित हुआ । जब हम आत्मघाती सं स्कारो के सा थ पूर्णत्व क्रिया कर रहे थे, मुझे वह घटना याद आयी जिससे मुझे मेरे अस्तित्व का ज्ञान हुआ । मैं स्पष्ट रूप से देख सकता हूँ की कै से इसने मेरे पूरे जीवन को प्रभावित किया। और जब मैं अपने सं स्कारो को ज्ञात कर पाया, मैं उन्हें पूरी तरह छोड़ने के लिए सक्षम था, ऐसा महसूस हुआ कई वर्षों के प्रतिरोध, संदेह, आत्मोत्सर्ग और आत्म घृणा पिघ ल गई है । यह मेरे लिए एक बड़ी सं तोष की बात है ।

जब मैंने अपने परिवार के सा थ पूर्णत्व किया, तब उन्होंने बहुत सराहा, और वे अत्यन्त ग्रहणशील व खुश थे। पहली बार मुझे ऐसा अनुभव हुआ कि एक सुन्दर सम्बन्ध के आरम्भ के लिए सारे द्वार खुल गए हैं । यह वास्तव में अद्भुत है !

  • नित्यसत्यस्वरूपन,

Sharing Par ā vidy ā, the highest knowledge of Self

In the Upanishads are fo und two kinds of knowledge: Par ā vidy ā, the higher, spirit ual knowledge of o ur Self and o ur p urpose of Existence; and Apar ā vidy ā, the lower, intellect ual knowledge .

H . H . THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM shares Par ā vidy ā e xperientially, gi fting the highest knowledge in his programs, knowing which people learn to grasp all kinds of knowledge, practically apply and live them .

I work as an IT Director for a Fortune 500 company. What I learnt in my past years and in my company is negligible compared to what I learnt in the 21 days Inner Awakening Program. I am attending this program with my teenage daughter and son. Life completely changed, its irreversible in a good way. I wish everybody who have youth as their children should send them to this IA program, and enjoy their life, and give life to life. Swamiji has blown away my mind's chatter box.

बिल्डर - लॉस एं जिल्स, यु एस ए

First time, I felt that I am LISTENING. In my age more than 50 years, "I never listened." My wife used to tell me, "You are not listening to me." Now I know what she meant. Now I know how to listen to authentically listen myself as well as to others. By listening what is happening – bringing fulfillment to myself and others; and getting what I want to do and what others want to do. So, there's no 'you' and 'me', and it becomes one. Its such an energy and I want to treasure this. This authentic listening is a new, better way of communication. The health recovery that I have seen in myself! 23 years of my diabetes is completely gone. No medicines, nothing.

Thaigarajan,

IT Director, H o uston, USA

सभी जीव जं तु जन्म, मरण, प्रजनन, परिपक्वता एवंमृत्यु के अनुभवो से निकलते हैं। किसी भी व्यक्ति की आयु कई कारको से निर्धारित होती है। एक समय पर बुढ़ापा एक अटल अवस्था माना जाता था और उसे पूर्वनिर्धारित एवं अपरिवर्तनीय कहा गया है।

हाल ही में कई जं तुओ पर किये

गए वैज्ञानिक प्रयोगोंमें पता चला

है कि बूढ़ेहोने की प्रक्रिया को

मद्धम किया जा सकता है, साथ

ही साथ स्वाथ्य एवं जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाया जा

सकता है।

२०१० और २०१४ के बीच २१

दिन के इनर अवेकनिं

ग (आई.ए.)

कार्यक्रम के प्रतिभागियो पर चार

विभिन्न परन्तु आपस में जुड़े हुए प्रयोग किये गए ।

माइटोकॉन्ड्रियल अध्ययन

पहला प्रयोग ५० वर्ष से अधिक आयु के २० आई.ए. प्रतिभागियो एं वं २० बिना आई.ए. किये हुए प्रतिभागियो पर किया गया। माइटोकॉन्ड्रियल गतिविधि के मात्रात्मक परख को

मापने के लिए एम.टी.टी. परख तकनीक का उपयोग किया गया था। सभी स्वयं सेवको के रक्त के नमूने पहले दिन और २०वें दिन पर लिए गए।

परिणामो के अध्ययन समूह में सांख्यिकीय महत्वपूर्ण माइटोकॉन्ड्रिय गतिविधि और कोशिकाओ की व्यवहारिकता में वृद्धि का प्रदर्शन किया।

माइटोकॉन्ड्रिया व्यक्ति की कोशिकाओ के लिए बैटरी या ऊर्जा उत्पादको की तरह हैं।

वे सब कोशिकाओ की जीवित गतिविधियो को बनाए रखने के लिए एवं ऊर्जा के उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं।

व्यायाम और एलोपैथिक दवाएं मानक तरीको से लगभग 30% तक माइटोकॉन्ड्रियल गतिविधि में सुधार कर सकते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया क्षति के लिए अतिसंवेदनशील है, और एक क्षतिग्रस्त

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओ के नुकसान, उम्र बढ़ने एवं अंततः मृत्यु का कारण बनता है। माइटोकॉन्ड्रिया को सीधे मनुष्य की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

जीन अभिव्यक्ति अध्ययन

मनुष्य में 25,000 जीन हैं, जिनमें से लगभग 10,000 किसी भी एक समय में व्यक्त होते हैं। जीन कोशिकाओंमें प्रोटीन के उत्पादन से लेकर प्रजनन तक लगभग सभी कार्यक्रमो को नियंत्रित करते हैं। जीन का व्यक्त या अव्यक्त होना पर्यावरण या एपिजेनेटिक कारको पर निर्भर करता है।

चिकित्सा की भाषा में इसे "अप-रेगुलेशन" और "डाउन-रेगुलेशन" कहा जाता है । वर्तमान में, प्रत्येक जीन की भूमिका एवं गतिविधि क्रियाओ के तरीके ( जो उनके द्वारा बढ़ाये या अवरोधित किये जा सकते हैं) के बारे में बहुत कु छ जाना गया है । वे इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्त कर रहे जीन उस समय किस समूह पर आधारित हैं ।

इस अध्ययन में, 40 नमूने परिधीय रक्त से लिए गए और चार समूहोंमें जमा किये गए। इनर अवेकनिं ग प्रोग्राम के समय, 0 दिन और 21 दिन पर उनके जीन की अभिव्यक्ति का "अफ़िमेट्रिक्स माइक्रोचिप", परिधीय "ल्यूकोसाइट" द्वारा अध्ययन किया गया ।

परिणाम से पता चला की अध्ययन के अंत में 420 जीन उप - रेगुलेटेड और 165 जीन डाउन -रेगुलेटेड थे । जीन आंटलजी अध्ययन, वर्तमान में उपलब्ध डेटाबेस का उपयोग करके बताता है कि न्यूरोट्रांसमीटर, कैं सर और स्टेम कोशि काओंमें स्वरोग क्षमता के सं बं ध में महत्वपूर्णदो गुना परिवर्तन हुआ है ।