KAILASA Library/Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक/पवित्र चिदंबरम मं दिर का पुनर्निर्माणSign in
Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक

पवित्र चिदंबरम मं दिर का पुनर्निर्माण

नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, सीएटल आदिनम एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र है, एक महान दूरदृष्टि और दैव ऊर्जा से परिपूर्ण, अमेरिका के पेसिफिक तथा उत्तरपश्चिम भाग में आध्यात्मिक चेतना का जागरण करने हेतु ।

  • ® देवालय एक मं दिर तेजस्वी जिवंत मूर्तियो का निवास एवं नित्य पूजाए ।
  • ® विद्यालय आत्मज्ञानी बालको का प्रादुर्भाव प्राचीन वैदिक ज्ञान के साथ।
  • ® अन्नालय प्रसाद के रूप में रुचिकर सात्विक भोजन उपलब्धि में सेवारत।
  • ® ध्यानालय ध्यान व ज्ञान सं चय का केंद्र।
  • ® सेवालय एक पवित्र ऊर्जा केंद्र विश्व को लाभान्वित करने हेतु प्रतिबद्ध।

युवा भक्त भरतनाट्यम नृत्य प्रदर्शन करते हुए, सीएटल आदिनम में

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी श्री नित्यानंदेश्वर और श्री नित्यानंदेश्वरी के साथ आशीर्वाद देते हुये ।

नित्यनन्देशवर हिन्दू मं दिर, ओहायो आदीनम में स्वयं सेवको की प्र शं सा दिवस

भक्त जन THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के प्रवचन को श्रवन करने मन्दिर मे । नीचे: श्री नित्यानंद गणेश और नित्यानंद महालक्ष्मी ।

नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, कोलं बस, ओहायो, युएसए का उद्घाटन THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा 14 अप्रैल 2007 को हुआ । यह मं दिर परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा भारत के बाहर स्थापित प्रथम मं दिर है। यह मं दिर भौतिक रूप से केवल नौ महीनोंमें अस्तित्व में आया था, जब THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने घोषणा की थी कि ओहायो में एक शिव जी मं दिर स्थापित होगा ।

मं दिर की मुख्य अधिकृ त मूर्तियां हैं, श्री नित्यानंदेश्वर और श्री नित्यानंदेश्वरी (भगवान शिव और देवी) 7 फु ट लम्बी और 6 टन की ग्रेनाइट की मूर्तियां हैं, जिनके मुख स्वयं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा शिल्पित किये गए हैं।

मूर्तियां दक्षिण भारत के अरुणाचल पर्वत की दिव्य ऊर्जाव शक्ति का प्रतीक हैं, जहां भगवान शिव जी स्वयं अनंत ज्योतिर स्थम्भ के 'लिङ्गोत्भव' रुप मे प्रकट हुये थे ।

नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर कोलं बस आदिनम, यु एस ए

मं दिर उद्घाटन समारोह दो सप्ताह तक चले और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा अधिकृ त मूर्तियों में दिव्य ऊर्जा की प्राणप्रतिष्ठा, एक दर्ल ु भ दैवक प्रक्रिया द्वारा सं स्थापित हुई जिससे उनके आशीर्वाद सहित मूर्तियां जीवंत हो उठी। ं

कुम्भाभिषेकम, एक पवित्र विधि है, मं दिर को ब्रह्म ऊर्जा से ऊर्जान्वित करने के लिए, जो मूर्तियों में प्रतिष्ठित होती है, यह मानवता की बहुत बड़ी सेवा है, क्योंकि यह आसपास के क्षेत्रों की सकारात्मक क्षेत्रों ऊर्जा को बढाती है, और शुद्ध दिव्य ऊर्जा सबके लिए उपलब्ध करवाती है।

नित्यनानन्देश्वर हिदं ूमं दिर प्रवेश मार्ग, कोलंबस, ओहायो

ध्यान कार्यक्रम: समुदाय को कल्याण और पूर्णत्व देते हुए ।

रथोत्सव, देवताओ की यात्रा, समस्त समुदाय के साथ दिव्यता के सानिध्य का उत्सव ।

मं दिर सुंदर प्राकृतिक स्थल पर है, जहाँ दो नदियां बह रही है, ओलेंतंञ नदी, और एक छोटी नदी जो इसमें मिलती है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने इन दो नदियो के सं ग ं म को "पश्चिम का प्रयाग" घोषित किया है, तथा इस मं दिर को आध्यात्मिक नाम "ओहायो प्रयाग" दिया है । अमरीकी कुम्भ मेला के समय, अप्रैल १५, २००७ में, स्वामीजी ने कहा था कि – इन दोनो नदियां का सं ग ं म भारत के प्रयाग की भांति है, तथा इस बहाव की दिशा तीन पवित्र नदियो से ं मिलती जुलती है (त्रिवेणी सं गम) - गंगा, यमुना तथा सरस्वती । नदी की सुंदरता तथा शांत वातावरण के कारण, मं दिर भगवान शिव के निवास कै लाश एवं हिमालय की स्मृति दिलाता है ।

वैदिक सं स्कृति के मूल आदर्शों के सं रक्षण हेतु तथा उसके प्रति समर्पित पूजा, हवन एवं वैदिक मं त्र उच्चारण क्रियाएं सं चालित कर तथा सब महान हिदं ू उत्सव मनाए जाते हैं ।