KAILASA Library/Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक/उपलब्धियांSign in
Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक

उपलब्धियां

  • ® 100% शिशु सर्वोत्तम स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा, स्वस्थ, विकसित और उत्तम भार वाले उत्पन्न होते हैं और उच्च बौद्धिक, भावनात्क एवं अध्यात्मिक स्तर पर पूर्ण विकास होता है।
  • ® पीडा रहित प्राकृतिक प्रसव। अचेत करके प्रसव कराने के ' शून्य प्रकरण'। मां एवं नवजात के लिये प्रसव का सचेत व सुखद अनुभव ।
  • ® शल्यक्रिया से प्रसव की दर में महत्वपूर्ण गिरावट।
  • ® अपेक्षाकृ त कम प्रसव काल।
  • ® अब तक प्रसव-पश्चात अवसाद की ' शून्य घटनायें'।
  • ® 90 % नवजात में यौगिक मुद्रा ओ (ं जैसे चिन मुद्रा में उं गलियो अं थवा सम्पूर्ण शरीर में अध्यात्मिक लक्षण) से युक्त होते हैं।
  • ® गर्भाधान के समय उपयुक्त अनुवांशिक लक्षणो के चयन के ल ं िये ''एपीजेनेसिस'' की शक्ति के दोहन हेतु तकनीक की स्थापना। यह सं तति में रोगो एं वं अन्य व्यावहारिक अवगुणो के स्ं थानांतरण को समाप्त कर देता है।

Research findings based on information polled from program participants.Findings are subjective in nature .

इस खंड में वर्णित गतिविधियो को स ं र्वज्ञपीठ की गम्भीरता एवं विस्तार को स्पष्ट करने हेतु बताया गया है। किंतु, कृ पया ध्यान में रखें कि इस खंड में वर्णित गतिविधियो का सं चालन लाभ ं हेतु निजी लिमिटेड कं पनी द्वारा सं चालित किया जाता है, जो दान ग्रहण नही करते ं है।

  • ® नित्य योग S M, नित्य क्रिया S M पूर्णत्व का विज्ञान, ध्यान, कल्पना को दृश्यांकन, मं त्र-जप, एवं गर्भ संवाद (अजन्मे शिशु से संवाद) जैसी तकनीक का समावेश। प्रसव काल में शिशु के पिण्ड को सकारात्मक जैव स्मृतियो (bio-memory) के ल ं िये तैयार करना जिससे कि उच्च विकसित एवं प्रबुद्ध आत्मा आकर्षित हो सके ।
  • ® नित्य योग S M, नित्य क्रिया S M पूर्णत्व का विज्ञान, ध्यान, कल्पना को दृश्यांकन, मं त्र-जप, एवं गर्भ संवाद (अजन्मे शिशु से संवाद) जैसी तकनीक का समावेश। प्रसव काल में शिशु के पिण्ड को सकारात्मक जैव स्मृतियो (bio-memory) के ल ं िये तैयार करना जिससे कि उच्च विकसित एवं प्रबुद्ध आत्मा आकर्षित हो सके ।
  • ® 100 से अधिक विश्व भर के दंपतियो ने कार्यक्रम किये।
  • ® डॉक्टरो का ं मार्गदर्शन व आसान एंटिनेटल के यर द्वारा प्रसव तकनीक दी जाती है।

eN Pregnancy Care classes held reg ularly in comm unities

डॉ श्रीलेखा कार्तिक ऍम डी, डी एन बी (Pediatrics) परामर्शक बाल चिकिस्तक और नियोनेटोलौजिस्ट, बं गलुरू , भारत

एन प्रेग्नेन्सी कै यर (एन गर्भ धारण सं रक्षण), प्राचीन वैदिक परंपरा और आधुनिक वज्ञानि ै क प्रमाणीकरण का ऐसा मिश्रण है जिसमे स्वस्थ बाल जन्म का परिणाम सुनिश्चित रूप से सम्मिलित

है।

एक बाल चिकित्सक होने के नाते मैं पुष्टि कर सकती हूँ कि यह एक बार में उपलब्ध, सम्पूर्ण समाधान है, जो नवजात शिशु की देख भाल सम्बंधित रोग जैसे समयपूर्व जन्म, अंतर्गर्भाशयी विकास, मानसिक मंदता, जन्म श्वासावरोध, रक्तविशणता आदि में सहायक और समस्याओ का स ं माधान है।

ध्यान अभ्यास, योग एवं शक्तिशाली तकनीक जैसे पूर्णत्व, एक तनाव मुक्त गर्भाधान अवधि सुनिश्चित करते है, जिसके परिणाम स्वरुप अधिकांश माँएं ४० सप्ताह की पूर्ण अवधि तक गर्भ धारण करती हैं, तथा अच्छे ३-४ किलो के वजन वाली सं तान को जन्म देती हैं।

हम यहाँ आत्मप्रशं सा करना चाहेंगे, कि हमने जो प्राथमिक अभ्यास किया, उसमें आज तक जन्म समय पर दम घुटना, या रक्तविषणता का एक भी प्रकरण नही हुआ ं है। माताएं , जन्म के तुरंत बाद अपनी सं तान से सम्बन्ध जोड लेती है व स्तन पान कराना आरम्भ कर देती हैं और सं तान को केवल स्तनपान ही कराने के हेतु प्रेरित की जाती हैं। स्तनपान की दर सामान्य जनता से उल्लेखनीय रूप में ऊपर है जिससे नवजात शिशु को उत्तम परिणाम मिलते हैं।

माता पिता के सूचनाओ के आधार पर ब ं च्चे, शांत, उत्तेजनहीन, सतर्क और अपने आसपास सबसे एकत्व में रहते है।वे अच्छी रोग प्रतिरोधक शक्ति के होते हुए , स्वास्थ्य में विकास तथा वद्धिृ के चरण प्रदर्शित करते हैं । वे उदर पीड़ा से मक्तु , सं गीत प्रिय और अच्छी नीदं सोने वाले होते हैं। अधिकांश बच्चे, चिन मुद्रा में ध्यान मग्न दिखते हैं , जो जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।

वे अद्भुत विशि द्भु ष्टताएं जैसे प्रेम, दया, दूसरो का ध् ं यान रखना, उनके साथ बाँटना और अहिसा प्र ं दर्शित करते हैं । मेरी भूमिका अब अस्वस्थ नवजात शिशुओ के च ं िकित्सक की नहींकिन्तु इन आनंदमय शिशुओ के पालन ं में साझदेार बनने की हो गई है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM को मेरा हार्दिक आभार है कि वैदिक विज्ञानं को उन्होंने इतने सरल और उपयो न्हों क्ता मैत्रीपूर्ण ढंगसे सम्पूर्णमानवता कल्याण हेतु उपलब्ध किया है।

यह निस्संदेह प्रथम चरण है एक स्वस्थ, बुद्धिमान, प्रेममय सभ्यता का निर्माण करने के लिए, जो पृथ्वी लोक की सामहूिक चेतना का उत्थान करेगी।

eN Pregnancy Care, the ancient Vedic science validated by modern medical science

डॉक्टर्स ने हमारे बच्चे को जांचा और कहा था कि शिशु का ह्रदय का बनयान भाग "हयपोप्लास्टिक" रोग ग्रस्त है । उन्होंने सु न्हों झाव दिए कि हम गर्भपात करवा दें, क्योंकि उसके बचने की सम्भावना और आगामी शल्यचिकित्सा की आवश्यकता एक कड़ा संघर्ष हो सकते है। स्वामीजी ने हमें आशीर्वाद दिया था और कहा था सब ठीक होगा वो सब सम्हाल लेंगे ।

महीनो पं हले श्री कालभैरव दर्शन के समय भगवान कालभैरव ने मुझे आशीर्वाद दिया और कहा था, "तुम दिव्य सं तान को जन्म दोगी , कालभैरव शिव तुम्हारे गर्भ से जन्म लेंगे।"

कितना उत्तम आशीर्वाद! हमारी सं तान अजय जन्म के बाद उष्मा नियांत्रक मशीन (इनक्यूबेटर) में रखा गया, तथा नसों द्वारा दवाई चढ़ाई गई, रह सके , जिससे ह्रदय कक्षों के बीच का क्षों छेद खुला रह सके । पिता जगप्रीत अजय के साथ थे और मंद स्वर में गुरु मं त्र उसको सुना रहे थे। ह्रदय निसं कु चन के सुधार के लिए शल्य चिकित्सा की गयी और वह सफल रही । चिकित्सक आश्चर्यमें थे, ह्रदय पूर्व जाँच के निरूपण द्वारा प्राप्त निष्कर्ष की अपेक्षा बहुत अच्छा लग रहा था।

अगले परिक्षण में जिस चिकित्सक ने कहा था की वाम पक्ष कभी दक्षिण पक्ष के बराबर वद्धिृ प्राप्त नही करेगा, एक अ ं द्भुत सद्भु माचार लेकर आया कि न केवल वह हर स्तर पर आश्चर्यजनक रूप से स्वस्थ हो रहा था, अपितु वाम पक्ष अब दक्षिण पक्ष के बराबर आकार में आ गया था।

ईश्वर और प्रिय गुरु की कृ पा से हमने यह चमत्कार अनुभव किया ।अब हम एक अद्भुत रूप से सुन्दर, द्भु शांत एवं सक्रिय बच्चे के चमत्कार के साक्षी हैं । यदि हमें जीवन में विश्वास ने होता, "एन गर्भ धारण सं रक्षण " का सहयोग प्राप्त न होता, और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी की कृ पा न होती, तो परिणाम कु छ और ही होता।

  • सैम, जगप्रीति
  • (अजय शिव के माता पिता), सिडनी ऑस्रेलट्िया

गुरु के आशीर्वाद से चमत्कारी ह्रदय वाला शिशु

  • ® एन प्रेग्नेन्सी SM कार्यक्रम द्वारा सं चालित कु ल ४९ सचेत प्रसूतियों में से २१ प्रतिभागियो ने प ं हले प्रयत्न में शिशु जन्म दिया, जिसे 'प्रिमि' कहते है।
  • ® एक असामान्य महत्वपूर्ण खोज प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण से सम्बंधित है जो ली प्रसूति पीड़ा और शिशु जन्म का महत्वपूर्ण अंग है।
  • ® प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण की माध्यमिक अवधि 38.62 मिनट थी जिसका अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम मानदंड 50 मिनट से 2 घं टे तक का है।
  • ® वस्तुतः प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण की अवधि में अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम मानदंड की अपेक्षा 24 प्रतिशत कम था।

यह सांख्यकीय रूप से बहुत महत्वपूर्णहै और सिद्ध करता है कि एन प्रेग्नेन्सी SM (एन गर्भ धारण) की प्रक्रिया, सं तान के हित के अतिरिक्त माँ के लिए और माता -पिता के सम्बन्धों के ल म्बन्धों िए अद्भुत लाभ दयाक है।