KAILASA Library/Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक/अतिरिक्त पाठ्यक्रमSign in
Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक

अतिरिक्त पाठ्यक्रम

हमारे दोनो बच्चों को नित्यानंद गुरुकु ल में भर्ति कराना हमारे जीवन का सबसे उत्तम निर्णय रहा है । हमने उन्हें परिपक्व और पुश्पित होते देखा है जो हमारी कल्पना के परे है । उनका शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण बहुत सुंदर है । उन्हे शिक्षा गृहण करने से प्रेम है और वे यह व्यवहार जीवन के सभी भागो मे धारण करते है । शिक्षा मे श्रेष्ठ होना उनकी विद्या के प्रति प्रेम, उत्साह का उपफल है । और इस प्रेम भाव से, उनमे शक्तियां भी प्रकट हो रही है जैसे नेत्र बंद कर पडना और भविष्यवाणी करना आदि। धन्यवाद नित्यानंद गुरुकु ल और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वमीजी ।

नित्यानंद गुरुकु ल ने मेरी बालिका को घर से विद्यालय तक एक सुचारू परिवर्तन दिया । उनके पास प्रशिक्षित शिक्षक है जो बालको के प्रति दया और सं भावना से व्यवहार करते है । पाठ्यक्रम बहुत प्रगतीशील है फिर भी बालक उत्साह से सीखते है । बहुत पौष्टिक भोजन दिया जाता है और मेरी बालिका को बहुत पसंद है । यह एक सं पूर्ण विद्यालय है जो बालको को सभी

" त्रिनेत्र जागरण की दीक्षा के बाद बाल सं त आखं पर पट्टी बाधं कर न के वल अग्रेंजी बल्कि ऐसी भाषाओ ंजिन्हेंवे नही ंजानते हैं, जैसे जर्मन, हिन्दी, गुजराती और तमिल में भी पढ़ने में सक्षम हो जाते हैं। इतना ही नही ंकिसी अन्य स्थान पर रखे गये कागज पर लिखित शब्दों को भी शब्दों वे पढ़ सकते हैं।

बाल संतों ने अपने अंदर एक और विशाल संभावना की खोज की है, जिसे अभिव्यक्ति का विज्ञान कहते हैं। इस ज्ञान से वे किसी भी समय इच्छित वस्तु प्राप्त कर सकते हैं। उनमें अपनी कल्पनाओं को यथार्थ में बदलने की क्षमता उत्पन्न हो जाती हैं। कुछ बाल संतों ने THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के दर्शन व बरसात की इच्छा प्रकट की। उन्होंने साधारण रूप से इसकी घोषणा करते हुये कुछ विभूति को हवा में फूंका। आश्चर्यजनक रूप से कुछ मिनट बाद ही THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM वहां आये और सबको आशीर्वाद दिया, जिसके बाद बहुत तेज बरसात हुयी! पांचवीं कक्षा के कई बाल संतों को उन्नयित करके दसवीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा देने हेतु भेजा गया! त्रिनेत्र जागरण से उनमें अकल्पनीय बौद्धिक क्षमता आ गयी। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के अपने पुत्र, बाल संतों ने THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा दिये गये आत्मलिंग से कभी भी किसी असहाय अथवा कष्ट में व्यक्ति के उपचार का अवसर नहीं खोया। बाल संत प्रेम से पाले गये अपने पशुओं जैसे खरगोश, पक्षियों आदि के प्रति भी अपना प्यार बरसाने में आनंद की अनुभूति करते है।"

~ शरण्य श्रीधर, नित्यानन्द गुरुकु ल छात्रा

" हमारे गुरुकु ल में, मैं बच्चों को नाना प्रकार की शक्तियों से दीक्षित करता हूँ। फिर उन्हें स्वयं उस सिद्धि को और विकसित करने की छूट दे देता हूँ।

१२ वर्ष की आयु में जब मेरे भीतर ज्ञानोदय हुआ, तब मुझे दसो दिशाओं में देखने का अनुभव प्राप्त हुआ। मैंने बच्चों को इस सिद्धि की दीक्षा दी, और उन्हें स्वयं इस पर प्रयोग करने की पूरी स्वतंत्रता दी। इस कारण अब ये बच्चे और भी कई नयी शक्तियों का प्रदर्शन करने लगे हैं। ये बच्चे विभिन्न भाषाओं को डाउनलोड (संकलित) कर लेते हैं। वे और भी कई नए कार्य कर दिखाते हैं, जिन्हें मैंने भी नहीं किया इस आयु में। "

~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

तृतीय नेत्र जागरण दीक्षा प्राप्त करने के पश्चात कई बच्चे और व्यस्क महा सिद्धियाँ एवं अलौकिक शक्तियां व्यक्त करने लगते हैं। उदहारण के लिए :-

  • ® उच्च कोटि की सर्जनशीलता, नए विषयों को शीघ्र सीखने और समझने की क्षमता, अद्भुत अंतर्ज्ञान का अनुभव, इत्यादि
  • ® स्वास्थ्य में सुधार, प्रबल रोग प्रतिरोधक क्षमता।
  • ® दोनों नेत्रों के बिना देखने और पढ़ने की क्षमता। इससे मस्तिष्क में नए आयाम जागृत होते हैं, जिसके परिमाण स्वरुप कई नयी सिद्धियाँ मनुष्य के लिए संभव हैं, विशेष रूप से स्वास्थ्य और शारीरिक विकास के क्षेत्र में । उदाहरण के लिए, क्षीण दृष्टि वाले लोगो के लिए तृतीय नेत्र की मदद से देख पाना संभव हो सकता है ।
  • ® तृतीय नेत्र के माध्यम से शारीरिक बीमारियों का पता लगाना |

तृतीय नेत्र जागरण के प्रभाव