KAILASA Library/Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक/नित्य आध्यात्मिक आरोग्य SMSign in
Sarvajnapeetha - Hinduism का थिंक टैंक

नित्य आध्यात्मिक आरोग्य SM

"उसने कहा कि नित्य आरोग्य लेने के एक माह बाद उसकी आँखों से एक प्लास्टिक का कड़ा निकला "

म सैं ्वमीजी से दीक्षा लिया ह ु आ एक नित्य आरोग्य कर्ता हूँ। एक वर पहले म ्ष ने हा ैं र्ट, माइंड एंड बॉडी फेस्टिवल पर एक बू थ लगाया था। एक अंग्रेज सज्जन हमारे बू थ पर ु ल्क आरोग्य लेने आये। मने उनसे ैं छा उन्हें क्या कष्ट है ? उन्होंने कहा कि उनके नेत्रो में कष्ट है। मने इन ैं ्हे उसी समय नित्य आध्यात्मिक आरोग्य प्रदान किया। क ुछ घंटो बाद मने उनसे प ैं ू छा कि अब उनके नेत्र कै से हैं ? उन्होंने कहा कि पिछले ६ माह से होने वाला कष्ट चला गया

एक माह पहले मु झे उनसे फिर मिलना हु आ, उसी पर्व पर. मने उनसे प ैं ू छा अब वे कै से हैं ? तब उन्होंने कहा कि आपसे नित्य आरोग्य प्राप्त करने के लगभग एक माह बाद उनके नेत्रो से एक प्लास्टिक का टु कड़ा अपने आप बहार आ निकला। उन्होंने बह ु त आभार व्यक्त किया।

दिनेश ग ु प्ता (श्री नित्य साधनानन्द )

"मेरी पु रानी घु टनो की पीड़ा चली गयी , अब म पैं ू री तरह पीड़ा म ु क्त हूँ. " घ ु टनो की सर्जरी की वजह से मेरे दोनों घु टनो में सदा पीड़ा बानी रहती थी। अक्सर सीढ़ियाँ चढ़ना कष्टदायी होता था और मु झे दर्द निवारक दवाइयां कहानी पड़ती थी। मने THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी के साथ अंतः जाग्रति कार्यक्रम किया। कार्यक्रम में कई पीड़ा निवारक ध्यान करवाए गए , जिनसे मेरे घु टनो की पीड़ा सदा के लिए चली गयी !

इसके अलावा मु झे दध भी नहीं पचता ू था. म दैं ध म ू ें उपस्थित लैक्टोस पचा नहीं पाता था। जबसे मने स ैं ्वामीजी के ध्यान कार्यक्रमों में भाग लिया है, मेरी लैक्टोस की अपचन दर हो ग ू यी है। अब म दैं ध ू आसानी से पचा लेता हूँ.

मने कई डॉक ैं ्टरों से बात की और वे सं इस बात से अचंभित हैं कि ये चमत्कार कै से ह ु आ क्यूंकि उनके अन ु सार बिना दवा के लैक्टोस अपचन का कोई उपचार नहीं।

म ु क्तानंद सीएटल , अमेरिका

"डॉक्टरों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने देखा कि मेरे अंडशयो के चारो और अब एक भी गाँठ नहीं। .." २०१२ में जब मेरे शरीर की जांच की गयी तो डॉक्टरों ने बताया कि मेरे अंडाशयों के चारो ओर कई गांठे हैं, जिनका होना मेरे लिए ठीक नहीं। जब म २०१२ ैं दिसंबर के अंतः जाग्रति (इनर अवेकनिंग ) कार्यक्रम में गयी, मने स ैं ्वामीजी से अपनी व्याधि का वर्णन किया। उन्होंने म ु झे देखा , अपने हाथो को तलवार की तरह काटने जैसे घु माया और कहा, " इसकी चिंता तु म म ु झपे छोड़ दो। .."

उसके पश्चात मु झे कु छ विचित्र सा तेज दर्द होने लगा पेट में, तब मु झे ये अन ु भूति ह ु यी कि स्वामीजी म ु झे आरोग्य दे रहे हैं। फिर लगभग २० दिन पश्चात जब में मलेशिया लौटी तो मने ैं फिर से अपने डॉक्टरों से अपनी जांच करवाई और पेट का स्कैन भी करवाया। डॉक्टरों को ये जान कर बड़ा अचम्भा ह ु आ कि मेरे अंडाशय के आस पास अब एक भी गाँठ नहीं थी। अहा , कितना सु खद चमत्कार था

देवा प्रियानंद सेरेमबन , मलेशिया